ये 6 उदाहरण काफी हैं ये कहने के लिए की भारत की महिलाएं पुरुषों से किसी भी लिहाज में पीछे नहीं हैं

भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ देश है। लेकिन भारत के बारे में ये एक कड़वा सत्य भी है कि भारतीय समाज आज भी कई मामलों में बेहद पीछे है। बात अगर महिलाओं के बारे में की जाए तो भारतीय समाज में आज भी महिलाओं को पुरुषवादी सोच की छायां तले जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर होना पड़ता है। और ये कड़वी हकीकत भारत के मेट्रो शहरों में भी देखने को मिल जाती है। लेकिन कुछ महिलाएं हैं जो हमारे समाज की इस दकियानूसी सोच के जाल को तोड़ती हैं। आज हम आपको छह ऐसी ही महिलाओं से रूबरू करा रहे हैं।

1- शांति देवी, ट्रक मैकेनिक

हमारे देश में महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वो या तो घर में रहें, या फिर पढ़-लिखकर टीचर, बैंकर या डॉक्टर बनें। कोई भी ये उम्मीद नहीं कर सकता कि अगर कोई महिला पढ़ी-लिखी नहीं है तो ट्रक मैकेनिक जैसा पुरुष वर्चस्व वाला काम कर सके। लेकिन भारत की पहली महिला ट्रक मैकेनिक शांति देवी इस धारणा को ना सिर्फ तोड़ती हैं। बल्कि एक सफल ट्रक मैकेनिक भी बनती हैं। दो दशक से भी ज़्यादा वक्त से शांति देवी ट्रकों के भारी-भरकम टायरों को रिपेयर करती हैं। गज़ब के आत्मविश्वास से शांति देवी कहती हैं कि वो कई पुरुष मैकेनिक्स से भी ज़्यादा शानदार काम करती हैं।

2- अमनदीप कौर, महिला बाउंसर

आपने भी क्लब्स और पब्स में सुरक्षा के लिए तैनात हट्टे-कट्टे बाउंसरों को देखा होगा। इन बाउंसरों को देखकर किसी की भी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी कि भारत में कई महिला बाउंसर्स भी हैं। भारत की पहली महिला बाउंसर चंडीगढ़ की अमनदीप कौर हैं। वहीं मेहरुनिंसा दिल्ली की पहली महिला बाउंसर हैं।

3- जयलक्ष्मी, स्विगी फूड डिलीवरी गर्ल

ऑनलाइन फूड ऑर्डर में जाना-पहचाना और बड़ा नाम स्विगी में यूं तो अधितर स्टाफ लड़के ही होते हैं। लेकिन इन दिनों बड़ी संख्या में लड़कियों और महिलाओं ने भी स्विगी डिलीवरी जैसे चुनौतीपूर्ण काम में हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। चेन्नई की जयलक्ष्मी को इसकी शुरूआत करने का श्रेय जाता है।

4- वसंथा कुमारी, बस ड्राइवर

वसंथा कुमारी सिर्फ भारत की ही नहीं, बल्कि एशिया की पहली महिला ड्राइवर हैं। 1993 से बस चला रही वसंथा कुमारी सालों से बस में सैकड़ों पैसेंजर्स को संभालती आ रही हैं। शुरू में ये काम अपना घर चलाने के लिए उन्होंने शुरू किया था। लेकिन बाद में ये काम उनका पैशन बन गया।

5- महिलाओं द्वारा चलाई गई पैसेंजर ट्रेन

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भारत का एक महिला क्रू एक पैसेंजर ट्रेन को 111 किलोमीटर तक ले गया। ये ट्रेन झारखंड की राजधानी रांची से लातेहर तक गई थी। इस ट्रेन में लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट, टिकट चेकर और गार्ड सिर्फ महिलाएं ही थी। इतना ही नहीं, इस ट्रेन में मौजूद आरपीएफ सिपाही भी महिलाएं ही थीं।

6- अश्विनी वासकर, पहली महिला बॉडी बिल्डर

कभी अपने ज़्यादा वज़न से परेशान रहने वाली अश्विनी वासकर आज भारत की पहली महिला बॉडी बिल्डर हैं। बढ़ते वज़न से टेंशन में रहने वाली अश्विनी ने जिम जॉइन किया और वहीं पर इन्होंने भारत में होने वाली पहली महिला बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के बारे में सुना। अश्विनी ने इसके लिए मेहनत शुरू कर दी। कड़ी ट्रेनिंग से अश्विनी ने ना सिर्फ अपना वज़न कम किया, बल्कि अपनी बॉडी भी बेहद सुडौल बना ली। शुरूआत में घरवाले थोड़ा संशकित थे, लेकिन उन्होंने अश्विनी के हर फैसले में उनका साथ दिया।