पुलवामा हमला: अगर ये 5 कदम उठा ले भारत तो टूट जाएगी पाकिस्तान की कमर

सीआरपीएफ के काफिले पर पुलवामा में हुए कायराना हमले के बाद भारत ने आतंकवादियों और उनके पनाहगार पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया है। एक अहम फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया है। ऐसे में भारत की जनता ये उम्मीद लगा रही है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी सरकार और सेना समर्थित आतंकी संगठनों जैसे हक्कानी नेटवर्क, जैश, लश्कर, तहरीक ए तालीबान जैसे संगठनों पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक किया जाए। ये संगठन इस वक्त विश्व शांति के लिए खतरा बने हुए हैं। आईए हम आपको बताते हैं कि वो कौन से 5 कदम हैं, जिन्हें अगर भारत उठा ले तो पाकिस्तान स्थित आतंक की फैक्ट्री तबाह हो जाएगी।

1- घर में घुसकर मारना

Knock at home

जैसे अमेरिकी ने पाकिस्तान में घुसकर कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन को मारा था, ठीक वैसे ही अगर भारत हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करे तो पाकिस्तान में खड़े आतंकी ढांचे को काफी हद तक ढहाया जा सकता है। क्योंकि आज तक पाकिस्तान ने इस आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। लेकिन अब वक्त है कि भारत इज़रायल की तरह मुंहतोड़ जवाब देना सीख ले।

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2- कूटनीतिक दबाव

pm modi

भारत को पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाना होगा। इसके लिए भारत को खाड़ी देशों के साथ अपनी मित्रता का फायदा उठाना होगा। शुक्रवार को हुई अहम बैठक में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात को स्वीकार किया और उन्होंने संकेत दिए कि भारत इस दिशा में कदम उठाने वाला है।

3- पाक समर्थकों पर कश्मीर में रोक

pakistan supporters in Kashmir

सेना के ऑपरेशन ऑलआउट से कश्मीर के आतंकवादियों में खबलबी मची हुई है। कश्मीर में मौजूद पाकिस्तान समर्थकों और अलगाववादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे पाकिस्तान कश्मीर में कमज़ोर पड़ेगा।

4- सिंधु जल संधि तोड़ना

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भारत अगर सिंधु जल संधि को तोड़ दे तो पाकिस्तान को सीधा होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा। इस बात को वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे कंवल सिब्बल भी स्वीकार करते हैं। भारत पर इस संधि को तोड़ने का कोई असर नहीं होगा। लेकिन पाकिस्तान पर इसका बुरा असर पड़ेगा। पाकिस्तान के पास भारत के इस कदम का कोई जवाब नहीं होगा।

5- बलूचिस्तान, गिलगित और पीओके में आज़ादी की मुहिम का समर्थन

Balochistan

अब वक्त है कि भारत जैसे को तैसा वाली नीति अपना लेनी चाहिए। अपनी उत्पत्ति के बाद से ही पाकिस्तान भारत विरोधी रुख पर कायम है। जैसे भारत ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान का समर्थन किया था, ठीक उसी तरह भारत को गिलगित, बलूचिस्तान और पीओके में पाकिस्तान से आज़ादी की मांग कर रहे लोगों को खुलकर समर्थन देना होगा।