जानिए कैसे आमिर खान की 3 इडियट्स तो नहीं पर मजेदार है सुशांत-श्रद्धा की छिछोरे

सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर की फिल्म छिछोरे का ट्रेलर जब आया था, तब लोगों को लगा था कि ये आमिर खान की 3 इडियट्स या करण जौहर की स्टूडेंट ऑफ द ईयर जैसी होगी. इस फिल्म को देखकर आपको दूसरी फिल्मों की याद आ सकती है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि छिछोरे की अपनी कोई पहचान नहीं है.

कॉलेज लाइफ की बात आती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में आमिर खान की फिल्म 3 इडियट्स का ख्याल आता है. राजकुमार हिरानी का बनाया मास्टरपीस जितनी बार देखा जाए कम है. वो फिल्म इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स की कहानी पर आधारित थी और डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म छिछोरे भी इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स की ही कहानी पर आधारित है. बस इस बात के आगे दोनों फिल्में बिल्कुल अलग हैं.

ये कहानी है इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अनिरुद्ध पाठक, माया और उनके दोस्तों सेक्सा, एसिड, मम्मी, डेरेक और बेवड़ा की. कहानी की शुरुआत फ्लैशबैक में होती है, जहां अनिरुद्ध यानी अन्नी (सुशांत सिंह राजपूत) अपने हॉस्टल में मचने वाली खलबली के बारे में सोच रहा है. अनिरुद्ध और माया (श्रद्धा कपूर) का एक बेटा है, राघव, जो अपने मां-बाप की तरह इंजीनियरिंग करने का सपना लिए जी रहा है. राघव ही वो कारण है कि ये सभी दोस्त एक बार फिर एक-दूसरे से मिलते हैं. हालांकि ये कारण बहुत दुखदायी है. ये आपको जानना है तो फिल्म देखनी होगी.

फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने बढ़िया काम किया है. एक स्मार्ट स्टूडेंट, जो चतुराई से सामने वाले को पागल बनाता है और एक बाप जो अपने बेटे से बहुत प्यार करता है- किरदार के ये दोनों ही पहलु उन्होंने बढ़िया निभाए हैं. इसके अलावा एक्टर वरुण शर्मा, ताहिर राज भसीन, नवीन पॉलीशेट्टी, तुषार पांडे, प्रतीक बब्बर और सहर्ष शुक्ला का काम भी बढ़िया है. श्रद्धा कपूर अपने किरदार में बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

वरुण शर्मा ने फिल्म फुकरे में चूचा का किरदार निभाकर उसे अमर कर दिया. अभी तक हम सभी ने उन्हें हल्के-फुल्के किरदार निभाते ही देखा है. इन किरदारों में उन्होंने हमेशा बढ़िया काम करके दिखाया है. लेकिन इस बार आप वरुण शर्मा को कॉमेडी करने के साथ-साथ भारी भरकम डायलॉग मारते और सही में सेंस बनाते देखेंगे. वरुण का काम बहुत इम्प्रेसिव हैं.

ताहिर राज भसीन जिस सीन में होते हैं उसे अपना बना लेते हैं. इसके अलावा प्रतीक बब्बर भी काफी अच्छे थे. मेरे पर्सनल फेवरेट हैं नवीन पॉलीशेट्टी. उनका किरदार ना सिर्फ मजेदार है, बल्कि उनका काम भी उतना ही बढ़िया है. फिल्म देखकर आपको ऐसा लगेगा नहीं कि आप किसी फिल्म को देख रहे हैं. कॉलेज लाइफ की कहानी जब पर्दे पर चल रही होती है तब आपको अपने स्कूल/कॉलेज के दिन याद आ रहे होते हैं. फिल्म में पंच बहुत सही है. एकदम मस्त कॉमेडी दिखाई गई है.

दंगल के डायरेक्टर नितेश तिवारी कितनी बढ़िया फिल्में बनाते हैं, ये हम सभी को पता है. नितेश ने जिस तरह से इस कहानी को सामने रखा है और जो सीख देने की कोशिश है, वो तारीफ के लायक है. इसका मतलब ये नहीं है कि इसमें इम्प्रूवमेंट का कोई स्कोप नहीं है. लेकिन कभी-कभी लोगों को लाइट हार्टेड फिल्में देखने की जरूरत भी होती है. फिल्म के गाने भी बढ़िया हैं.

ये फिल्म सभी को एक बहुत जरूरी मैसेज देती है, जो आजकल की जनता का समझना बहुत जरूरी है. बाकी वीकेंड पर इन छिछोरों को देख आओ, मजा आएगा.