NIA की अदालत में पेश हुई प्रज्ञा ठाकुर, जज से कहा – मुझे कुछ नहीं पता

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भोपाल की नवनिर्वाचित भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर शुक्रवार को मालेगांव बम धमाके मामले में मुंबई में NIA अदालत में पेश हुईं. इस दौरान एनआईए के विशेष जज ने उनसे पूछा, ‘अब तक जांच में सभी गवाहों ने कहा है कि 29 सितंबर 2008 को एक धमाका हुआ था जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी. इस बारे में आपका क्या कहना है?’ जिस पर उन्‍होंने जवाब दिया- ‘मुझे नहीं पता.’

गौरतलब है कि प्रज्ञा ठाकुर गुरुवार देर रात नियमित विमान से मुंबई के लिए रवाना हुईं. मध्यप्रदेश के भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर आज मुंबई में NIA कोर्ट में विशेष जज वीएस पडलकर के सामने पेश होंगी. 2008 में मालेगांव में हुए बम धमाकों के केस में उनकी ये पेशी है. उनको गुरुवार को मुंबई की एनआईए की अदालत में पेश होना था. लेकिन उनके वकील ने जानकारी दी कि वो हाई ब्लड प्रेशर के कारण पेश नहीं हो सकीं.

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में कुल 4 बम धमाके हुए थे. जांच एजेंसी एटीएस ने तब कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 9 युवकों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को भी अक्तूबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ मकोका के तहत आरोप पत्र दायर किये गए थे. एटीएस ने मामले में एक आरोपी को सरकारी गवाह भी बनाया था, लेकिन बाद में वो मुकर गया.

आपको बता दें कि मालेगांव बम धमाकों की आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा ने बुधवार को बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता ली थी . इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें भोपाल लोकसभा सीट से दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया है. हालांकि इसकी चर्चा पहले से ही थी कि साध्वी प्रज्ञा बीजेपी में शामिल हो सकती है.

वहीं अब एक अर्जी में साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी को चुनौती दी गई है. ऐप्लिकेशन में प्रज्ञा ठाकुर के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि एनआईए कोर्ट ने उन्हें स्वास्थ्य कारणों से ही जमानत दी थी.

बता दें कि साध्वी उस वक़्त सुर्ख़ियों में आई, जब 2008 बम धमाके में उनके शामिल होने की खबर आई थी. इसके बाद उनको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने 9 साल जेल में काटे. हालांकि बाद में उनको उस केस से बरी कर रिहाई दे दी गई. वहीं साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘हिंदू आतंकवाद’ का जुमला गढ़ा और इस नैरेटिव को सेट करने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाया.