पत्थरबाज बेहतर थे या जैश-ए-मोहम्मद…पुुलवामा हमले पर फारुख अब्दुल्ला का दो टूक

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पुलवामा हमले को लेकर कश्मीर की जनता गुनहगार नहीं है. उन्होंने कश्मीर की समस्या को राजनीति की समस्या बताया उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान नहीं होता तब तक शायद ऐसी घटनाएं होती रहेंगी. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा कि आप ही बताएं जैश-ए-मोहम्मद बेहतर था या पत्थरबाज बेहतर थे. इसके साथ ही कहा कि इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार को कश्मीरियों का पहले दिल जीतना होगा।

कश्मीर को सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा समझना भूल

अब्दुल्ला ने आगे की अपनी बातचीत में घाटी के बाहर कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों पर हो रहे हमलों पर चिंता जताते हुए कहा कि कश्मीर को महज जमीन का टुकड़ा समझने वाले मूर्ख हैं. उनका मानना है कि कश्मीर यह लोगों से ही मुकम्मल है. फारूक अब्दुल्ला की मानें तो केंद्र में जब से मोदी सरकार आई है, तब से कट्टरता में वृद्धि देखने को मिली है. उनका कहना है कि मुस्लिम युवकों को लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा है, जिसके कारण मुश्किलें पैदा हो रही हैं.

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पुलवामा हमले के लिए मुस्लिम नहीं जिम्मेदार

फारुख अब्दुल्ला ने हमले के बाद दिल्ली में आयोजित सर्वदलीय बैठक की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मैंने उस बैठक में भी कहा था कि गलती हमारी नहीं है बल्कि आपकी है क्योंकि आपने हमारी उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं किया. मोदी सरकार पर ऊँगली उठाने से फारूक कहीं भी नहीं चूके. फारूक ने कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीरी पंडितों के लिए जो वादे किए थे, वो सिर्फ़ चुनाव जीतने के लिहाज़ से किए थे. वो उनके लिए कुछ नहीं करने वाले हैं. फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि आप हमारे निर्दोष बच्चों को निशाना बनाना बन्द करें. हम हर तरफ से बुरे फंसे हुए हैं और पुलवामा में जो कुछ भी हूआ उसके लिए हम कश्मीरी बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं हैं क्योंकि इन आतंकी संगठनों से हमारा कोई लिंक नहीं है और न ही भविष्य में होगा.