CAG ने राफेल की रिपोर्ट फाइल राष्ट्रपति को भेजी , जल्द संसद में होगी पेश

राफेल में हुए कथित घोटाले को लेकर कांग्रेस हमेशा ही सरकार का घेराव करती रही है | इन्ही आरोप प्रत्यारोप के दौरान CAG ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी | माना जा रहा है कि तैयार रिपोर्ट को जल्दी ही संसद पेश किया जायेगा | आपको बताते चलें की CAG अपनी रिपोर्ट की एक प्रति राष्ट्रपति और दूसरी प्रति वित्त मंत्रालय को भेजता है | बताया जा रहा है कि CAG ने राफेल पर 12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर अपना जवाब और संबंधित रिपोर्ट CAG को सौंपी थी, जिसमें खरीद प्रक्रिया की अहम जानकारी के साथ 36 राफेल की कीमतें भी बताई गईं थीं।

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माना जा रहा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की इस रिपोर्ट में डील में हुई प्रक्रिया जैसे फर्म का चुनाव, राफेल की तय कीमत, सुरक्षा मापदंडो व अन्य की जानकारी शामिल हो सकती है| कैग की यह रिपोर्ट काफी लंबी है, जिसे प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले राष्ट्रपति के पास भेजा गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से अब CAG रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और राज्यसभा चेयरमैन के ऑफिस भेजी जाएगी। बजट सत्र बुधवार को समाप्त हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में राफेल पर कैग रिपोर्ट को लोकसभा और राज्यसभा में भेज दिया जायेगा|

मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों के बीच सरकार पक्ष की तरफ से राफेल वार्ता का नेतृत्व कर रहे एयर मार्शल SBP सिन्हा ने जवाब दिया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि एक पॉइंट को साबित करने के लिए कुछ नोट्स चुनिंदा तरीके से उठाये गए। उन्होंने साफ कहा कि इनमें सच्चाई नहीं है। भारतीय टीम ने जो अपनी अंतिम रिपोर्ट दी है उस पर सभी 7 सदस्यों ने बिना किसी असहमति के हस्ताक्षर किए हैं।

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सरकार से सरकार के बीच कॉन्ट्रैक्ट में ऐंटी-करप्शन क्लॉज पर एयर मार्शल सिन्हा ने कहा कि अब तक हमारा अमेरिका और रूस के साथ ‘सरकार से सरकार के बीच’ कॉन्ट्रैक्ट था। यह तीसरा ‘सरकार से सरकार’ कॉन्ट्रैक्ट है, जो फ्रांस के साथ हुआ। ऐसा क्लॉज इनमें से किसी के साथ नहीं था।

वहीं the hindu ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भारत सरकार ने सप्लाई प्रोटोकॉल से मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) की उन धाराओं को हटा लिया था, जिसके अंतर्गत दलालों तथा एजेंसियों के इस्तेमाल पर दंड लगाने’ का प्रावधान था. इसके साथ ‘दसॉ एविएशन व एमबीडीए फ्रांस के कंपनी खातों में पहुंच के अधिकार’ देने वाले नियमों को भी हटा लिया गया. हलाँकि रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का ही पालन कर प्रक्रिया पूरी की है |