डॉ कफील मांग रहें सोशल मीडिया पर मदद, एक इंटरव्यू में बताई वजह

बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के साथ पूरे देश विदेश में उस वक़्त चर्चा में आ गया जब ऑक्सीजन की कमी से 36 बच्चों की मौत हुई. इन सभी बच्चों की मौतें दो दिनों के भीतर हुईं. जिसके बाद आनन-फानन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन जांच कमेटियों का गठन कर दिया. लेकिन सभी जांच कमेटियों ने अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी होने की बात से नकारते हुए कहा कि ये प्रशासनिक लापरवाही है.

गौरतलब है कि सरकार की तरफ से इन सभी मौतों की वजह प्रशासनिक लापरवाही बता कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से जुड़े कई लोगों को जेल में दाल दिया. इसमें ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स भी शामिल है. लेकिन इस घटना के बाद सबसे चर्चित नाम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कफील अहमद खान का है. पहले तो डॉ कफील मीडिया दवारा इस घटना के वो हीरो बनाए गए जिसने कई बच्चों की ज़िंदगियाँ बचाई लेकिन अचानक से सब उल्टा पड़ गया और डॉ कफील को जेल जाना पड़ा. दस्तावेजों को आधार माने तो घटना के समय कफील अहमद खान मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सा विभाग में जूनियर डॉक्टर-असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत थे.

अब डॉ कफील 18 महीने से निलंबित चल रहे है. हालांकि उनको पिछले साल अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी किया जा चूका है. हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने जमानत देते हुए कफील पर लगे आरोपों को खारिज किया था. वहीं डॉ कफील अब ट्विटर पर कम्पैन चला रहे हैं, #RevokeDrKafeel . जिसको उनके समर्थक ट्वीट भी कर रहे हैं.

द लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में डॉ कफील कहते है कि

मुझे अपनी बेसिक तनख्वाह का आधा ही मिल रहा है. बीते 18 महीने से मेरी यही स्थिति है.

वहीं जब उनसे पूछा गया कि आप अपने नाम के साथ इन दिनों “सस्पेंडेड लेक्चरर” लिखते हैं

“मेरा कहना साफ़ है. अगर आप मेरा निलंबन ख़त्म करके मुझे वापिस नहीं रख सकते तो आप मुझे नौकरी से पूरी तरह बाहर कर दीजिये. कम से कम मैं कहीं और काम करके अपने परिवार का पेट भर सकता हूं.”

जब उनसे सोशल मीडिया पर पैसा मांगे जाने पर हुई आलोचला को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि

“मैं पैसा न माँगता तो क्या करता? मेरे पास घर है, जमीन है. लेकिन मेरे जेल जाने के बाद कोई भी मेरी संपत्ति खरीदने को राजी नहीं हुआ. इसी कारण से मुझे पैसे भी उधार नहीं दे रहे लोग. दिक्कत हो रही है. क्या करता?”

सोशल मीडिया कम्पैन प्रश्न पर उन्होंने कहा कि

बहाली के संबंध में कुल 27 चिट्ठियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के मुख्य सचिव हिमांशु कुमार, मेडिकल एजुकेशन के डिप्टी जनरल केके गुप्ता और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल गणेश कुमार को लिखीं. कोई फायदा नहीं हुआ.

आपको बता दें कि कफील अहमद खान पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने और वित्तीय अनियमितता के आरोप भी लगे थे. नवम्बर 2017 में ही अदालत ने इन आरोपों को हटा दिया था. लेकिन फ़िलहाल डॉ कफील निलंबित चल रहे हैं, वो इसके चलते वो कई जगह प्रदर्शन करते भी नज़र आते है.