चुनावों के बाद देश में हो सकती है तेल की किल्लत, अमेरिका ने दिया झटका

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देश भर में लोकसभा चुनाव की धूम है मगर आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से आम लोगों पर महंगाई की मार पड़ सकती है. गौर करने वाली बात ये है कि अमेरिका ने भारत समेत अन्य देशों को ईरान से कच्चा तेल आयात करने को लेकर मिली छूट की अवधि आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.

जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन फीसदी की तेजी आई है, जो 6 महीने का ऊच्चतम स्तर है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की आशंका है. इस वजह से आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि साल सितंबर मे जब कच्चे तेल का वायदा भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था, उस वक्त मुंबई समेत देश के कई महानगरों में पेट्रोल के दाम 95 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए थे. वर्तमान में कच्चे तेल का वायदा भाव 74 डॉलर के ऊपर चला गया है.

अमेरिका द्वारा उठाए गए इन कदमों के बाद भारत ये रास्ते अपना सकता है. कच्चे तेल की आपूर्ति में होने वाली कमी की भरपाई के लिए भारत की ओर से सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मैक्सिको जैसे देशों से वैकल्पिक स्त्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि भारत को इन देशों से कच्चे तेल के आयात के लिए भी ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है. इसके अलावा इस महीने के आखिर में होने वाली बैठक में भारत, अमेरिकी सरकार से छूट की मियाद को 2 मई से आगे बढ़ाने के लिए दबाव डाल सकता है.

चीन के बाद ईरान के कच्चे तेल का आयात करने वाला भारत दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. आंकड़ों पर गौर करें तो भारत अपनी खपत का 10 फीसदी तेल ईरान से खरीदता है. हालांकि अमेरिकी प्रतिबंध के बाद 2018-19 में ईरान से तेल के आयात में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह अभी भी करीब दो करोड़ टन सालाना है.

भारत सरकार में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति के लिए एक मजबूत योजना तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देशों से अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था होगी.