नमामि गंगे : रिपोर्ट : मोदी सरकार के तीन सालों में गंगा का पानी और खराब हुआ

गंगा
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वक्त था 2014-15 का लोकसभा चुनाव थे. जी हां…याद दिला दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले और प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगा नदी की सफाई का संकल्प लिया था.

जिसके बाद इसके लिए 2015 में शुरू की गई ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत उनकी सरकार अब तक 20,000 करोड़ रुपये लगा चुकी है.

मगर आपको बता दें कि बीते तीन सालों में गंगा का साफ होना तो दूर, उसकी हालत और ज्यादा खराब हुई है. वाराणसी स्थित संकट मोचन फाउंडेशन (एसएमएफ) नामक संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि गंगा के पानी में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया और जैवरासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है.

आपको बता दें कि एसएमएफ 1986 से गंगा के पानी की गुणवत्ता पर नजर रख रहा है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि इसके लिए एक गैर-सरकारी संस्थान ने अपनी खुद की प्रयोगशाला बनाई हुई है.

संस्था नियमित तौर पर नदी के पानी की जांच करती रहती है. टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक एसएमएफ ने गंगा नदी से जुड़ा जो डेटा इकट्ठा किया है, वह नदी के पानी में फैल चुके भयानक प्रदूषण की गवाही देता है.

विशेषज्ञों की मानें तो 100 मिलीलीटर या उससे कम पीने योग्य पानी में 50 एमपीएन (मोस्ट प्रोबेबल नंबर) कॉलिफॉर्म होना चाहिए.

वहीं, नहाने वाले पानी की इतनी ही मात्रा में 500 एमपीएन कॉलिफॉर्म चल जाता है. इसके अलावा गंगा के एक लीटर पानी में बीओडी की मात्रा तीन मिलीग्राम से कम होनी चाहिए.

एसएमएफ के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी, 2016 में गंगा नदी के पानी में प्रदूषित कॉलिफॉर्म की संख्या 4.5 लाख से 5.2 करोड़ तक पाई गई थी. लेकिन फरवरी, 2019 आते-आते यह संख्या 3.8 से 14.4 करोड़ तक पहुंच गई.

इस गैर सरकारी संस्था के अध्यक्ष आईआईटी-बीएचयू के प्रोफेसर वीएन मिश्रा कहते हैं, ‘इसी तरह बीओडी का स्तर जनवरी, 2016 से फरवरी 2019 के बीच 46.5-54 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 66-78 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है.

इसके अलावा पानी में ऑक्सीजन की मात्रा प्रति लीटर छह मिलीग्राम होनी चाहिए जो इस अवधि के दौरान घट कर 2.4 से 1.4 मिलीग्राम रह गई है.’ प्रोफेसर मिश्रा आगे कहते हैं, ‘गंगा के पानी में कॉलिफॉर्म का भारी मात्रा में होना मानवीय स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है.’

तो फिर ये सिर्फ सरकार की ही नहीं हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि गंगा को साफ करने के लिए खुद तत्पर बनें.