बांग्लादेश कहाँ से कहाँ निकल गया ,पाकिस्तान देखते ही रह गया

कभी पाकिस्तान से अलग हो कर बना एक देश, जो आज पाकिस्तान से कई मायने में आगे चला गया है| जी हां हम बात कर रहे है बांग्लादेश की जो आज कई समस्याए जैसे की विशाल आबादी, अशिक्षा-भ्रष्टाचार, प्राकृतिक आपदाओं और रोहिंग्या शरणार्थियों से जूझने के बावजूद भी तरक्की की राह पर दौड़ रहा है| अर्थशास्त्री इसे आने वाले समय का एशियाई शेर भी कहने से गुरेज़ नहीं करते |

imran khan

1971 में पश्चिम पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार के अन्याय विरूद्ध,एक रंक्तरंजित युद्ध हुआ जिसके बाद बांग्लादेश बना और जिसको बनाने में भारत का महवत्पूर्ण सहयोग को भी नकारा नहीं जा सकता है | गंगा-ब्रह्मपुत्र के मुहाने पर स्थित यह देश, प्रतिवर्ष मौसमी उत्पात का शिकार होता है और चक्रवात भी यहां बहुत सामान्य हैं | लेकिन ये सभी वजहें बांग्लादेश की तरक्की के आगे टिक नहीं पायी और और बताया जाता है कि बांग्लादेश की इस तरक्की के पीछे निर्यात का बढ़ना है जो 1971 में शून्य से बढ़कर 2018 में 35.8 अरब डॉलर पहुँचा | बांग्लादेश में कपास का उत्पादन नहीं होता है| लेकिन टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांग्लादेश सिर्फ चीन से पीछे है. वहीं पाकिस्तान का कुल निर्यात 24.8 अरब डॉलर का ही है.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 2021 तक 322 डॉलर हो जाएगी, जो की अभी केवल 180 अरब डॉलर की ही है| इसका मतलब ये माना जा सकता है की आने वाले कुछ समय में बांग्लादेश के लोग पाकिस्तानी लोगो के बराबर समृद्ध हो जाएंगे | भविष्य में अगर पाकिस्तान रूपए में थोड़ी भी गिरावट हुई तो तकनीकी रूप से बांग्लादेश,पाकिस्तान से ज्यादा समृद्ध हो जाएगा|

कई और मापदंडो पर देखा जाये तो बांग्लादेश पाकिस्तान से आगे ही नज़र आता है और ये आश्चर्यजनक भी है | आज बांग्लादेश की आबादी 16.5 करोड़ है जबकि पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ है | एक अनुमान के मुताबिक 2007 से 2010 के बीच बांग्लादेश की जनसंख्या 150 से 170 लाख के बीच होनी चाहिए थी| बांग्लादेश दुनिया का 8 वां सबसे अधिक आबादी वाला देश है | बांग्लादेश में चलाए गए कैंपेन की वजह से तेजी से बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाया जा सका, जबकि पाकिस्तान में जनसंख्या वृद्धि को लेकर आज भी कोई भी कैंपेन नजर नहीं आता है |

ये भी पढ़ें : हमारे पास है सिखों का मक्का-मदीना-पाकिस्तानी पीएम इमरान खान

वही स्वास्थ के क्षेत्र की बात करे तो उसमे भी बांग्लादेश, पाकिस्तान को बगले झांकने पर मजबूर कर देता है | बांग्लादेश में पाकिस्तान के मुकाबले शिशु मृत्यु दर कम है. बांग्लादेश में जीवन प्रत्याशा (72.5 साल) पाकिस्तान में जीवन प्रत्याशा (66.5 साल) से कहीं अधिक है | अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन के मुताबिक, बांग्लादेश में रोजगार में महिलाओं का प्रतिशत (33.2) है जबकि पाकिस्तान की 25.1 फीसदी महिलाएं ही रोजगार में हैं.

पाकिस्तान का ‘गरीब भाई’ कैसे इतनी तेजी से समृद्ध हो रहा है? यह एक बड़ा सवाल इसलिए भी है क्योंकि बांग्लादेश के पास ऐसी कोई भू-राजनीतिक पूंजी भी नहीं है जिसे वह अमेरिका, चीन या और विकसित देशो को बेच सके | बांग्लादेश के पास ना कोई परमाणु हथियार हैं, ना ही भारी-भरकम सेना है और ना ही खास बौद्धिक संपदा. यहां तक कि बांग्लादेश बनने के समय उनके पास प्रशिक्षित ब्यूरोक्रेसी भी नहीं थी| बांग्लादेश के पास ब्यूरोक्रेसी के नाम पर बस भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक पूर्व सदस्य था.

कुछ लोगों ने उम्मीद की कि शायद अब पाकिस्तान इससे सबक सीखेगा और अपने देश की तरक्की के लिए जरूरी बदलावों को लागू करेगा | लोगों को लगा कि अब पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना छोड़कर, देश हित में ठोस कदम उठाएगा और अपनी विविधता से भरी संस्कृतियों को सम्मान देगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

बांग्लादेश और पाकिस्तान दो अलग-अलग देश हैं और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को तय करने का नजरिया अलग है. बांग्लादेश मानव विकास और आर्थिक वृद्धि में अपना भविष्य देखता है. वहां निर्यात बढ़ाने, बेरोजगारी हटाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने, कर्ज घटाने जैसे लक्ष्य तय किए जाते हैं. किसी भी देश से विवाद की स्थिति में भी इस देश की प्राथमिकता बदलती नहीं है |

पाकिस्तान को अभी ये समझना होगा की उसकी प्रथिमिकताये भारत से दुश्मनी नहीं, जबकि भारत से सिखने की है, क्यूंकि पाकिस्तान के लिए ये जरूरी
है कि CPEC (चाइना-पाक इकनॉमिक कॉरिडोर) हो या ना हो, भारत से टैंक से टैंक और मिसाइल से मिसाइल की बराबरी करना फ़िलहाल उसके लिए असंभव है. असलियत यह है कि वह बांग्लादेश से भी पीछे छूट रहा है. अमेरिका,चीन और सऊदी अरब का नाम बोल कर पाकिस्तान कहीं नहीं पहुंच पाएगा.