कुलभूषण जाधव मामले में इमरान सरकार की फिर हुई किरकिरी

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में गुरुवार को पाकिस्तान की इमरान खान सरकार की एक बार फिर से किरकिरी हुई है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भारत को कुलभूषण के लिए वकील नियुक्त करने का दूसरा मौका दिया है। इस मामले में पाकिस्तान सरकार लगातार अपने नापाक इरादे जताती रही है।

भारत को एक और मौका देते हुए इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया। अब कोर्ट में 6 अक्टूबर को सुनवाई होगी। पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने जुलाई महीने में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए एक वकील नियुक्त करने की मांग की थी। इसके संबंध में सरकार ने एक याचिका दायर की। कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि, इस्लामाबाद हाईकोर्ट को आईसीजे के फैसले के अनुसार सैन्य अदालत के फैसले की समीक्षा और पुनर्विचार करने के लिए एक वकील नियुक्त करना चाहिए।

इससे पहले, पाकिस्तान ने भारतीय वकील को नियुक्त करने की मांग खारिज कर दी थी। पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफीज चौधरी ने पिछले सप्ताह कहा था, ‘इस देश की अदालत में भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भारतीय वकील को अनुमति देना कानूनी रूप से संभव नहीं है।’

उन्होंने कहा था कि भारतीय पक्ष जाधव का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भारतीय वकील को अनुमति देने की असंगत मांग कर रहा है। हमने बार-बार उन्हें कहा है कि केवल वे वकील ही अदालत में जाधव का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिनके पास पाकिस्तान में वकालत करने का लाइसेंस है।

जानें पूरा मामला

पाकिस्तान झूठा दावा करता आया है कि जाधव को जासूसी के आरोप में 2016 में बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था, जबकि भारत पाक के इस पैंतरेबाजी को खारिज कर चुका है। भारत ने कहा है कि जाधव को चाबहार के ईरानी बंदरगाह से अगवा किया गया था। 2017 की शुरुआत में, एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। मई 2017 में, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस  ने उनकी फांसी पर रोक लगा दी थी। इसके बाद पिछले साल जुलाई में, 15-1 के वोट से आईसीजे ने भारत के इस दावे को सही ठहराया था कि पाकिस्तान ने कई मामलों में कॉउसंलर रिलेशंस पर वियना कन्वेंशन के नियमों का उल्लंघन किया है।