आइए जानते है 1 अप्रैल को ही मूर्ख दिवस क्यों मनाते है हम?

कल रात से ही आपके फ़ोन पर ऑनलाइन शॉपिंग करने पर 80 प्रतिशत तक छूट मिल रही है,एक मूवी टिकट खरीदने पर दो मूवी के टिकट मुफ्त मिलेंगे, मेरा एक्सीडेंट हो गया है जैसे मैसेज आने अलगे होंगे। जिससे एक बार ही सही आप मुर्ख तो ज़रूर बने होंगे।

आज के दिन सभी एक दूसरे को मुर्ख बनाने के लिए अलग-अलग तरीके की प्लानिंग करते हैं. बहुत से देशों में 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस यानि अप्रैल फूल के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लोग आपस में मज़ाक कर एक दूसरे को हंसी मजाक भरे अंदाज़ में मुर्ख बनाते है. हर देश में इस दिन को अलग-अलग तरीके से मानते हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर इस दिन का इतिहास क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

इस दिन को लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती हैं. प्राचीन कल में 1 अप्रैल के दिन कई ऐसी मज़ेदार घटनाएं हुई, जिसके चलते इस दिन को लोग अप्रैल फूल-डे के तौर पर मानाने लगे. कहा जाता है कि अप्रैल फूल्स डे (मूर्ख दिवस) की शुरुआत फ्रांस में 1582 में उस वक्त हुई, जब पोप चार्ल्स 9 ने पुराने कैलेंडर की जगह नया रोमन कैलेंडर शुरू किया.

बताया जाता है कि उस दौरान कुछ लोग पुरानी तारीख पर ही नया साल मनाते रहे और उन्हें ही अप्रैल फूल्स कहा गया. अप्रैल फूल को लेकर कई और कहानियां भी प्रचलित हैं. कई रिपोर्ट्स की माने तो इसकी शुरुआत 1392 भी बताई जाती है, लेकिन इसके कोई पुख्ता सबूत नहीं है.

वहीं कई रिपोर्ट्स में ये भी लिखा है कि साल 1508 में एक फ्रांसीसी कवि ने अप्रैल फूल का सन्दर्भ दिया था. वहीं 1539 में फ्लेमिश कवि ‘डे डेने’ ने एक अमीर आदमी के बारे में लिखा, जिसने 1 अप्रैल को अपने नौकरों को मूर्खतापूर्ण कार्यों के लिए भेजा था. ऐसी ही कई अन्य कहानियां भी प्रचलित हैं.

कहानियों की तरह इस दिन को सेलिब्रेट करने के भी अलग-अलग तरीके है. जहा फ्रांस, इटली, बेल्ज‍ियम में कागज की मछली बनाकर लोगों के पीछे चिपका कर मजाक बनाया जाता है तो वही ईरानी फारसी के नववर्ष के 13वें दिन तक एक दूसरे पर तंज कसते हैं.