लोकसभा चुनाव 2019 : जानिए ग़ाज़ीपुर सीट की विरासत और सियासत के बारे में

ग़ाज़ीपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख शहरों में से एक है. यह शहर गंगा नदी के ऊँचे कगार पर बसा हुआ है। स्थानीय लोग बताते है कि इस शहर को राजा ‘गाधिपुर’ ने बसाया था। इसका मूल नाम गाधिपुर ही था, जो मुग़ल शासन काल में, 1352 ई. के लगभग मसूद ग़ाज़ी के नाम पर ग़ाज़ीपुर हो गया. छोटे काशी के रूप में जाना जाने वाला गाजीपुर देश के सबसे बड़े गांव ‘गहमर’ की वजह से पूरे भारत में लोकप्रिय है.

आपको बता दें कि अंग्रेजों के दौर में गाजीपुर में 1820 में दुनिया के सबसे बड़े अफीम का कारखाना स्थापित किया गया था. वहीं गाजीपुर शहर अपने हथकरघा और इत्र उद्योग के लिए भी प्रसिद्ध हैं. अंग्रेज गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस की मृत्यु यहीं हुई थी उन्हें यहीं पर दफनाया गया. गाजीपुर के पश्चिम में वाराणसी, उत्तर में मऊ, पूर्व में बलिया, पश्चिमोत्तर में जौनपुर और दक्षिण में चंदौली जिला स्थित है.

गौरतलब है कि इस शहर का राजनितिक इतिहास भी काफी पुराना है. यहां पहला लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ था. हर प्रसाद सिंह ग़ाज़ीपुर लोकसभा सीट से पहले सांसद बने. फिर अगले चुनाव 1957 में भी उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वहीं इस सीट पर कम्युनिस्ट पार्टी का भी दबदबा सालों रहा. 1967 और 1971 के चुनावों में कम्युनिस्ट पार्टी से सरजू पाण्डेय निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे थे.

वहीं 1977 में इस सीट पर भारतीय लोकदल ने, 1980 और 1984 में कांग्रेस ने अपना परचम लहाराया था. हालांकि 1991 में हुए लोकसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना चुनावी वर्चस्व कायम किया और जीत हासिल की. 1996 में भारतीय जनता पार्टी को इस सीट पर पहली बार जीत मनोज सिन्हा के रूप में मिल.

1998 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के ओम प्रकाश सिंह ने यहां पर सपा की जीत का अकाल ख़त्म किया लेकिन. वहीं 1999 के चुनाव में मनोज सिन्हा ने अपनी पिछली हार का बदला ले लिया था और वो जीत के साथ लोकसभा पहुंचे थे, 2004 और 2009 में समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपना परचम लहराया लेकिन साल 2014 में ये सीट बीजेपी के ही पास चली गई और मनोज सिन्हा यहां से फिर एमपी चुने गए.

आपको बता दें कि साल 2014 में बीजेपी ने ये सीट सपा को 32452 वोटों से हराकर हासिल की थी. 2014 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी और सपा में काफी करीब की टक्कर थी. यहां की कुल आबादी 36,20,268 लाख है जिनमें पुरुषों की संख्या 18,55,075 लाख और महिलाओं की 17,65,193 लाख है। बता दें कि साल 2014 में यहां पर 1801519 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था. वहीं यहां की औसत साक्षरता दर 60.7% है. इस क्षेत्र में करीब 85 फीसदी हिन्दू आबादी और 15 मुस्लिम आबादी है.

रिपोर्ट्स के अनुसार मनोज सिन्हा अपने कार्यकाल में इस शहर में कई महत्वपूर्ण काम कर चुके है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बीजेपी का जातीय समीकरण को साधना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा क्योंकि सपा- बसपा का गठबंधन इस चुनाव में अहम होने जा रहा है.