लोकसभा चुनाव 2019 : क्या मेरठ सीट पर कायम रहेगा बीजेपी का दबदबा ?

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क्रांतिकारियों की धरती कहे जानी मेरठ लोकसभा सीट का भी चुनाव बहुत दिलचस्प रहने वाला है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को जीत की हैट्रिक बचाए रखने की चुनौती है तो सपा-बसपा गठबंधन को भी अपनी साख बचानी है. गौरतलब है कि पिछले दो दशक से ये सीट भारतीय जनता पार्टी का बनी हुई है. वहीं एक दिलचस्प बात ये है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत यहीं से की थी. फ़िलहाल यहां से बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल सांसद है.

आपको बता दें कि 1952 से लेकर 1962 तक इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस के शाहनवाज़ खान का कब्ज़ा रहा है. इसके बाद से इस सीट के आम चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी की जीत हुई. वहीं 1971 में एक बार फिर शाहनवाज़ खान ने वापस इस सीट पर जीत हासिल की. लेकिन 1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी के दवारा लगाई गई इमरजेंसी का असर पुरे देश में हुआ और कांग्रेस को इस सीट बड़ी हार का सामना करना पड़ा. हालांकि 1980 में कांग्रेस ने वापसी की लेकिन 1991 से लगातार तीन बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज किया और ये दबदबा अभी भी कायम है।

वहीं 2011 की जनगड़ना के अनुसार इस सीट पर 35 लाख से अधिक की आबादी हैं. इनमें 55.09 फीसदी से अधिक पुरुष और करीब 44.91 फीसदी महिला वोटर हैं. मेरठ में करीब 65 फीसदी हिंदू जनसंख्या और 36 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या हैं. मेरठ लोकसभा के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण और हापुड़ की सीट है. 2017 के विधानसभा चुनाव में इनमें मेरठ शहर समाजवादी पार्टी तथा अन्य विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं.