भाषा की मर्यादा लांघ कवि कुमार विश्वास ने की केजरीवाल पर अभद्र टिप्पणी

कवि राज यानी कुमार विश्वास जो खुद को महिलाओं का सम्मान करने वाला व्यक्ति बताते है, लेकिन ऱाजनीति की लालसा के आगे साहब अपनी मर्यादा तो दूर, अपनी भाषा को भी संभाल ना पाए. ये काफी हैरान करने वाली बात है जो कुमार अपनी कविताओं में कोमल व सहज भाषा का प्रयोग करते नज़र आते हैं, वही कुमार विश्वास सोशल मीडिया पर इतनी आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग कैसे करते हैं?

आपको बता दें कि कुमार ने अरविन्द केजरीवाल को निशाना बनाते हुए एक बेहूदा ट्वीट किया, उन्होंने लिखा कि “दो दिन पहले आत्ममुग्ध बौना”पूर्ण राज्य” जैसे अप्रासंगिक विषय पर @RahulGandhi को कोस रहा था, @INCIndia के दफ़्तर पर माँ-बहन करवा रहा था,आज हरियाणा के लिए फिर उसी द्वार पर “ललायित” है. बौने के ट्वीटर लिलिपुट-चिंटूओ,इस कायर-मनोरोगी की सत्तालिप्सा के लिए क्यूँ रोज़ गालीयाँ खाते हो?

गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को एक ट्वीट कर कांग्रेस से विनती करते नजर आए कि अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस हाथ मिला लें तो बीजेपी को हराया जा सकता है. लेकिन तब भी अगर कुमार विश्वास को आपत्ति थी और वो आप पार्टी के नेता या एक आम इंसान के तौर पर केजरीवाल की आलोचना करना चाहते भी थे तो भाषा का स्तर यह नहीं हो सकता है.

कुमार दिल्ली के मुख्यमंत्री को कायर और मनोरोगी बता रहे हैं, लेकिन कुमार विश्वास खुद की भाषा स्तर पर ध्यान दे तो उन्हें पता लग जाएगा कि उनकी कायरता ये है कि वो एक चुने हुए मुख्यमंत्री ट्विटर पर भद्दी-भद्दी गलियां दे रहे हैं. कुमार विश्वास को समझना होगा की गालियों से कभी-कभी राजनीति में गद्दी तो मिल जाती है, लेकिन सालों की कमाई हुई इज़्ज़त मिनटों खत्म हो जाती है. अब आगे कुमार विश्वास पर है कि उन्हें अपना राजनीतिक हित साधना है या फिर जनता के दिल पर राज करना है.