लोकसभा चुनाव में साध्वी प्रज्ञा के अलावा, ये प्रत्याशी भी हैं जमानती उम्मीदवार

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माना जाता है कि सियासत में हर चीज़ जायज़ है, इसमें किसी जेल में बंद कैदी का चुनाव लड़ना हो या फिर ज़मानत पर बाहर चल रहे किसी व्यक्ति को टिकट देना हो. पिछले कुछ दिनों से ये चर्चा का विषय बना हुआ है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, जो मालेगांव बम ब्लास्ट में आरोपी होने के साथ ही साथ जमानत पर बाहर चल रही हैं, तो बीजेपी ने उनको टिकट कैसे दिया। वहीं भारतीय जनता पार्टी की इसके लिए आलोचना भी रही है, इस आलोचना का एक कारण ये भी है कि साध्वी ने स्वास्थ का हवाला देकर जमानत हासिल की थी. लेकिन अब वो चुनाव प्रचार के दौरान फुर्ती के साथ घूमते फिरते नज़र आ रही हैं. आपको बता दें कि साध्वी के साथ-साथ कुछ ऐसे और उम्मीदवार हैं जो ज़मानत पर बाहर है.

साध्वी प्रज्ञा

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आरोप- 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में कुल 6 बम धमाके हुए थे. जांच एजेंसी एटीएस ने तब कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर 9 युवकों को गिरफ्तार किया था. इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को भी अक्तूबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ मकोका के तहत आरोप पत्र दायर किये गए थे. वहीं 2011 में यह केस महाराष्ट्र ATS से NIA को सौंप दिया गया. 13 मई 2016 को NIA ने सबूतों के अभाव में प्रज्ञा समेत पांच आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप वापस ले लिए. 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाकुर को सशर्त जमानत दी. जमानत के आदेश के मुताबिक प्रज्ञा ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही थीं और चल भी नहीं सकती थीं.

चुनाव – साध्वी प्रज्ञा ने हाल में ही बीजेपी में शामिल हुई हैं. उनको मध्यप्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है. वो कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान में उतरी हैं.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी

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आरोप – 1938 में पं. नेहरू ने नेशनल हेरल्ड अखबार शुरू किया था, जिसका मालिकाना हक एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के पास था। AJL अन्य अखबार भी छापता था. 2008 में AJL ने अखबार न छापने का फैसला किया. अब तक AJL पर 90 करोड़ रुपए कर्ज भी चढ़ चुका था. कर्ज की भरपाई के लिए ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी-राहुल गांधी की 38-38% हिस्सेदारी है. कांग्रेस से ‘यंग इंडिया’ को 90 करोड़ का कर्ज दिया गया, जिससे ‘यंग इंडिया’ ने AJL के 99% शेयर खरीद लिए. बाद में कांग्रेस ने ‘यंग इंडिया’ का 90 करोड़ का कर्ज भी माफ कर दिया। मोटा-माटी नतीजा यह हुआ कि ‘यंग इंडियन’ को लगभग फ्री में ‘AJL’ का स्वामित्व मिल गया. इस आरोप में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 19 दिसंबर 2015 को सोनिया-राहुल को जमानत दे दी.

चुनाव – कांग्रेस अध्य्क्ष राहुल गांधी और उनकी माँ सोनिया गांधी संयुक्त आरोपी है. आपको बता दें कि ये पहला केस है जिसमे गांधी परिवार का नाम सीधे तौर पर सामने है. वहीं चुनाव की बात करे तो राहुल इस बार दो सीट से चुनाव लड़ेंगे. उनकी पहली सीट अमेठी है, जिस पर वो सालों से चुनाव लड़ते आ रहे हैं. वहीं दूसरी केरल की वायनाड सीट है. बात सोनिया गांधी की करे तो वो अपनी पराम्परिक सीट रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी.

शशि थरूर

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मामला: 17 जनवरी 2014 की रात शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर दिल्ली के 5 स्टार होटल लीला पैलेस में मृत पाई गईं. पहले इसे स्वाभाविक मौत माना गया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि सुनंदा की मौत ज़हर से हुई थी।.पुलिस ने जांच शुरू की, तो थरूर से भी पूछताछ की गई. जुलाई 2018 में दिल्ली पुलिस ने थरूर की न्यायिक हिरासत की मांग की, जबकि थरूर ने अग्रिम जमानत की मांग की. लेकिन दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 5 जुलाई 2018 को थरूर को जमानत दे दी। हालांकि, थरूर के विदेश जाने पर कोर्ट ने रोक लगाई थी.

चुनाव – इस लोकसभा चुनाव में शशि थरूर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी लोकसभा सीट केरल की तिरुवनंतपुरम हैं. बता दें कि इस सीट पर तीसरे चरण में चुनाव हो चुका है.

कन्हैया कुमार

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अफजल गुरू की फांसी को ‘न्यायिक हत्या’ मानने वाले JNU के कुछ छात्रों ने 9 फरवरी 2016 को कैंपस में एक कार्यक्रम रखा. जिसको आपत्ति के बाद रद्द कर दिया गया था. हालांकि, इवेंट की जगह नारेबाजी हुई और टीवी पर विडियो चले कि JNU में देश-विरोधी नारे लगाए गए. 11 फरवरी 2016 को इस मामले की शिकायत पर कन्हैया और उनके साथियों पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ. जिसके बाद कन्हैया गिरफ्तार हुए और उन्हें 26 अगस्त 2016 को जमानत मिली। करीब तीन साल बाद 2019 में स्पेशल सेल ने इस केस में चार्जशीट दायर की गई.

चुनाव – कन्हैया कुमार ने पहली बार मुख्य धारा की राजनीति में कदम रखा हैं. इस बार कन्हैया सीपीआई के टिकट पर बेगूसराय से उम्मीदवार है, उनका सामना बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज के साथ ही साथ राजद के तनवीर हसन से होगा.

पप्पू यादव

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आरोप – बिहार के इस नेता पर वैसे तो कई संगीन मामले में मुकदमा दर्ज है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव की बात करें, तो पप्पू यादव को मार्च 2019 में दो केस में जमानत मिली हुई है. पहले 19 मार्च 2019 को पुलिस से बदसलूकी के 25 साल पुराने मामले में जमानत मिली. इस केस में पप्पू ने प्रयागराज कोर्ट में सरेंडर किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया और चार घंटे बाद उन्हें जमानत मिल गई. फिर 26 मार्च 2019 को पप्पू को 2015 में दरभंगा में आचार संहिता मामले में जमानत मिली.

चुनाव – कभी आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले पप्पू यादव इस बार अपनी बनाई ‘जन अधिकार पार्टी’ से चुनाव लड़ रहे हैं. पप्पू यादव पहले महागठबंधन के उम्मीदवार बनने का जुगाड़ लगा रहे थे, लेकिन इसमें उनको सफलता नहीं मिल पाई. अब वो खुद के दल से चुनाव लड़ेंगे.

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