मोदी सरकार चुनाव तक नहीं बताएंगी मुद्रा योजना का आंकड़ा – रिपोर्ट्स

मोदी सरकार पर आए दिन आरोप लगते रहें है कि वो आकड़ों को जनता के सामने पेश नहीं करती है. इसी क्रम में एक बार फिर सरकार पर आरोप लग रहा है कि मोदी गवर्नमेंट मुद्रा योजना के अंतर्गत मिलने रोज़गार का आंकड़ा सामने नहीं रख रही हैं. वहीं एक अंग्रेजी अख़बार के मुताबिक सरकार का कहना है कि वो 2019 लोकसभा चुनाव के बाद यह आंकड़ा सामने रखेगीं.

गौरतलब है कि अखबार में छपी रिपोर्ट में सूत्रों को आधार बताते हुए रिपोर्ट में लिखा है की सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस योजना का आंकड़ा लोकसभा मतदान के बाद बताया जा सकता है कि विशेषज्ञ समिति की तरफ से बताया गया है कि इस आंकड़े को जारी करने से पहले जो प्रक्रिया अपनाई गई है उनमें कई विसंगतियां है.

बता दें कि मुद्रा योजना मोदी सरकार की वह योजना है जिसमे स्वरोजगार के लिए धनराशि प्रदान की जाती है. इस योजना की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में की थी. प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई कई अहम योजनाओं में से एक योजना यह भी है.

मोदी सरकार का रोज़गार का आंकड़ा नहीं बताने का भी आंकड़ा बढ़ते जा रहा है, ये तीसरी बार है जब नरेंद्र मोदी सरकार ने आंकड़ों को बताने में देरी की है या पूरे तरीके से नहीं बताया ही नहीं हो.

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की एक अप्रकाशित रिपोर्ट, जो बिजनेस स्टैंडर्ड में छापी गई है, इस रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बेरोज़गार पिछले 45 साल में सबसे उच्तम स्तर पर पहुंच गया है. 2016-17 में ये दर 6.1 फीसदी थी. बता दें कि राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के विशेष मेंबर ने पिछले साल सरकार के आंकड़ा पेश न करने के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

बता दें कि मोदी सरकार ने अभी तक नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के आंकड़ें को प्रकशित नहीं किया है. इस रिपोर्ट में देश में बेरोजगारी के आंकड़े बताए गए थे.