मोदी जी एक दिन ट्विटर छोड़ असल में चौकीदारी कर लो, हम भी चौकीदार बन जाएंगे

चौकीदार. ट्विटर पर आजकल ये शब्द बहुत ट्रेंड में है. मोबाइल और कम्पयूटर पर हर कोई चौकीदार बनना चाहता है. जी हां आपको बता दें कि भाजपा नेताओं ने ट्विटर हैंडल में चौकीदार जोड़ दिया है.

ऐसा बोला जा रहा है कि कांग्रेस की चाल उल्टी पड़ गई. इसे मोदी जी का स्ट्रेट ड्राइव माना जा रहा है. फिल्हाल पिछले 5 सालों में मोदी जी ने काफी शॉट खेलें हैं. अगर देखा जाए तो इतने कम समय या यूं कहें इतनी कम बॉल पर इतने शॉट सिर्फ मोदी जी ही मार सकते हैं.

 

मगर हमें तो ऐसा लगता है आपका पता नहीं कि मोदी जी को एक काम और करना चाहिए. बड़ी महान-महान हस्तियां उनके दोस्त हैं. वह छोटे लोगों को वो मंच से संबोधित करते हैं, गौर करने वाली बात है कि वह बड़े लोगों से मुलाक़ात करते हैं.

अब कुछ दिन सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी वायरल हुई थी जिसमें उनसे ऐक्टर्स मिलने आये थे. एक फ़िल्म ऐक्टर हैं जिनका नाम है नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी. मोदी जी उन्हें फ़ोन करें और उनके जीवन की सबसे पहली नौकरी के बारे में पूछ लें. तस्वीर काफ़ी साफ़ हो जायेगी.

अपने देश की सबसे बड़ी बीमारी यही है कि भेड़चाल में चल देते हैं, अभी कुछ समय पहले तक तो पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा रहे थे घर के बाथरुम में बैठकर तो अब चौकीदार पर एक्सपर्ट बने जा रहै है. अगर ये च$%* चौकीदारों की एक शिफ्ट के बारे में ज़रा सा मालूम कर लें तो चौकीदारी निकल जायेगी.

जी हां..चौकीदारी कोई हल्वा पूड़ी की नौकरी नहीं है. 10 से 12 घंटे की शिफ्ट है. छुट्टी भी नहीं है हफ़्ते के सातों दिन नौकरी पर जाना पड़ता है. तनख्वाह 8 हजार रु. बड़े मुश्किल से.

मगर ये मोदी जी है और उनके कारनामे. मोदी जी को पीआर और सोशल मीडिया टीम ने सेकेण्ड भर में चौकीदार बना दिया. मेरे दफ़्तर की हालत ऐसी है कि नीचे खड़े गार्ड की किसी ने कम्प्लेंट कर दी.

आपको वह वीडियो तो याद ही होगा. जहां राजस्थान के झुंझुनू इलाके में कुछ लोगों ने एटीएम गार्ड को पीट-पीट कर मार डाला और फिर पैसा लूट कर भाग गए. वीडियो अभी तक इसलिए याद है क्योंकि एक नक़ाबपोश आदमी ने जिस हैवानियत के साथ गार्ड के सर पर पहली चोट की थी उसे देखकर कोई भी हिल सकता है. वो एटीएम गार्ड अस्पताल में इलाज के दौरान मर गया. इस वक्त फैशन में खुद को चौकीदार कह/लिख रहे लोगों में से शायद ही किसी को ऐसे हालात का सामना करना पड़े.

अगर आसान शब्दों में बोलें तो सरकार को अब हमें ही आईना दिखाना होगा. ऐसी बचकानी हरकतों को नजर अंदाज करके या फिर अंग्रेजी में बोलें तो इग्नोर करके.