संसद पहुंच रहा है राफेल, CAG की रिपोर्ट आज होगी पेश: घमासान की आशंका

लोकसभा चुनाव के महासंग्राम से पहले राफेल डील की लड़ाई अब तूल पकड़ते नज़र आ रही है. बुधवार को संसद के बजट सत्र का आखिरी दिन है. ऐसे में विपक्ष के उठ रहे सवालों के बीच मोदी सरकार आज लोकसभा में राफेल विमान सौदे पर कैग (CAG) रिपोर्ट को लोकसभा में पेश कर सकती है. आप को बताते चलें कि इस रिपोर्ट में कीमत के लिहाज से फ्रेंच लड़ाकू विमान की एक कॉम्पिटिटर यूरोफाइटर टाइफून जेट के ऑफर्स के साथ तुलना की गई है, हालांकि ऑडिटर ने राफेल डील का मूल्यांकन करते समय कीमतों को गोपनीय रखा है और इकलौते प्रतिस्पर्धी कंपनी के साथ पर्सेंटेज टर्म्स में तुलना की गई है.

हलांकि कांग्रेस का रुख रिपोर्ट को लेकर साफ़ नहीं है, क्यूंकि वो आरोप लगाती रही है की CAG ने सरकार के पक्ष में रिपोर्ट तैयार की है. आज राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान इस रिपोर्ट पर बोल सकते हैं. सरकार भी कई बिलों को पेश कर सकती है. गौरतलब है की विपक्ष, खासकर कांग्रेस राफेल में हुए कथित भष्टाचार को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर है और अन्य पार्टियों के साथ मिल कर CAG रिपोर्ट को सदन में पेश करने की मांग करती रही है. हालांकि दो दिन पहले आई CAG रिपोर्ट पेश नहीं हो सकी थी, लेकिन बजट सत्र के आखिरी दिन इसको केंद्रीय मंत्री पी. राधाकृष्णन द्वारा पेश किया जा सकता है.

रिपोर्ट क्या कहती है

सूत्रों की माने तो नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में एयरफ़ोर्स की राफेल डील के बारे में जानकारी के साथ उसकी परसेंटेज में तुलना की गई है. इस रिपोर्ट में राफेल की वास्तविक कीमत का कहीं ज़िक्र नहीं है. जबकि कांग्रेस राफेल की कीमत बताने पर अडी है.

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राफेल सौदा CAG की रिपोर्ट का महज एक हिस्सा है. CAG ने एक साथ अब तक के वायु सेना के ग्यारह रक्षा खरीद सौदों की ऑडिट की है. CAG रिपोर्ट में करीब 32 पेज 59,000 करोड़ रुपये की राफेल डील पर केंद्रित हैं. हालांकि ऑडिटर ने राफेल डील का मूल्यांकन करते समय कीमत को गोपनीय रखा है और इकलौती प्रतिस्पर्धी कंपनी के साथ पर्सेंटेज टर्म्स में तुलना की.

भारतीय वायु सेना के लिए 10 अन्य खरीद (जो रिपोर्ट का हिस्सा हैं) का मूल्यांकन करते समय ऑडिटर ने उनकी कीमतों का भी जिक्र किया है. UPA के शासनकाल में 126 लड़ाकू विमानों के हुए मूल MMRCA (मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रॉजेक्ट के तहत राफेल के लिए (L-1) सबसे कम बोली लगाई गई थी. इसके अलावा यूरोफाइटर दूसरा लड़ाकू विमान था, जो 6 प्रतिस्पर्धियों में तकनीकी परीक्षण में योग्य पाया गया था.

राफेल पर सरकार

सरकार ने राहुल गांधी के हर आरोप को नकार दिया गया है. पीएम मोदी ने कहा कि जो भ्रष्ट हैं, उन्हें ही मोदी से कष्ट है. वहीं सीक्रेट ई-मेल पर सरकार की ओर से कहा गया है कि वह ई-मेल राफेल डील से जुड़ा ही नहीं है। वह इमेल एक एयरबस की डील से जुड़ा है.