दृढ़ इच्‍छाशक्ति ने हेड कांस्‍टेबल की बेटी ज्योति शर्मा को बनाया BDO से डिप्टी कलेक्टर

नई दिल्ली: कॉन्वेंट स्कूल में नहीं पढ़ने और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के कारण ज्योति को यह डर सता रहा था कि वो सफल हो पाएंगी कि नहीं. इसके बावजूद वे पीछे नहीं हटी और अपनी मेहनत व लगन से सारी बाधाओं को पार करते हुए सिविल सेवा परीक्षा में सफ़लता हासिल की. ज्योति इस बात का सबूत हैं कि विश्वास वह शक्ति है जिससे एक साधारण सी सूनी पड़ी दुनिया में भी प्रकाश लाया जा सकता है. हर असमंजस को पीछे छोड़ते हुए जब हौसले के साथ मथुरा की ज्योति शर्मा (Jyoti Sharma) ने ये तय किया कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है तो परिवार, सीनियर्स और साथियों ने पूरा सपोर्ट दिया, ज्‍योति अपनी कामयाबी का श्रेय इन सभी को भी देती हैं.

12jdgloज्‍योति इस समय अयोध्या जिले के मिल्कीपुर में बतौर BDO तैनात हैं

UPPCS 2018 की परीक्षा में ज्योति शर्मा ने तीसरी रैंक हासिल कर टॉपर्स में जगह बनाई है. ज्योति मूलतः उत्तर प्रदेश के मथुरा से ताल्‍लुक रखती हैं, उनके पिता यूपी पुलिस में बतौर हैड कॉन्स्टेबल सेवाएं दे रहे हैं. पिता की नौकरी पुलिस सेवा में होने के कारण ज्योति की पढ़ाई-लिखाई लखनऊ में ही हुई, शहर के IT PG College से B.Sc में ग्रेजुएट होने के बाद उन्‍होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय ओपन यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में मास्टर्स डिग्री हासिल की.इस समय में वे अयोध्या जिले के मिल्कीपुर में बतौर BDO तैनात हैं, ज्योति के पिता का कहना है कि 8वीं क्लास के बाद ज्योति ने कभी किसी भी सब्‍जेक्‍ट की कोचिंग नहीं ली, B.Sc करने के बाद ही सिविल सेवा परीक्षा की ओर उनका रुझान बनने लगा था जिसके लिए उन्होंने मेहनत की और सफ़लता हासिल की.

NDTV से खास बातचीत में ज्योति ने बताया कि कैसे उन्होंने BDO रहते हुए भी परीक्षा में तीसरी रैंक हासिल करके यह साबित किया कि सरकारी पद पर रहते हुए भी सिविल सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए परीक्षा की तैयारी और कामयाबी हासिल करके सपनों को एक नई उड़ान दी जा सकती है. ज्योति सिविल सेवा या किसी भी अन्य कांपिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे उन नए बच्चों के लिए एक जीवंत उदाहरण है कि यदि एक बार मन पक्का कर लिया जाए तो कोई भी चीज़ आपकी राह की रुकावट नहीं बन सकती.