एसिड अटैक सर्वाइवर : मैं अपने पापा की परी हूं पर वो अब मेरा चेहरा नहीं देख पाते

Chapak

एक साक्षात्कार से प्रणित : 

दीपिका पादुकोण अभिनीत ‘छपाक’ एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की ज़िदगी पर बन रही है. 15- 16 साल की रही होंगी लक्ष्मी जब उनके चेहरे पर एसिड से हमला किया गया.

सर्वाइवर: जिसमें जीने की इच्छा, लड़ने की ताक़त इतनी हो की धातु को गलाने वाला एसिड भी उसकी जीवटता को ना गला पाए. जो दूसरों को ये संदेश भी देता है कि मुझे पीड़िता मत बोलो मैं कमजोर नहीं, बल्कि उसकी जीवटता के सामने उसकी पीड़ा का समर्पण है.

आए दिन हम ये खबरें पढ़ते हैं. एसिड से नहलाना, हम ऐसी घटना के बारें में बार-बार पढ़ते हैं. इनमें ही जिक्र होता है कि एसिड से ‘नहला दिया गया’ क्योंकि एसिड डाला गया है उस बच्ची पर, उसका गैंग रेप उसके घर में हो रहा था, हथियार के बल पर वो भी उसकी माँ के सामने. मना करने पर ऊपर से नीचे तक उसके शरीर को एसिड से भिगो दिया गया.

इसके बाद मैं क्या लिखूँ! जो धातु को गला दे उसकी बूँद जब शरीर पर पड़ेगी तो उस असहनीय तक़लीफ़ को आप क्या कहेंगे? मैं कोई शब्दों की जादूगर नहीं, इसलिए उस दर्द को बयाँ कर पाना मेरे बस की बात नहीं.

अपने एक साक्षात्कार के दौरान लक्ष्मी कह रहीं थीं कि एसिड डालने के बाद त्वचा वैसे ही गलना शुरू होती है जैसे आग में प्लास्टिक, जिसकी गंध भी बिल्कुल वैसी ही होती है.

वहीं एक दूसरी एसिड अटैक सरवाईवर रेशमा ने टीवी पर दिए गए साक्षात्कार में कहा कि (चेहरे के साथ-साथ एसिड अटैक में रेशमा की आँख चली गई) “मैं अपने पापा की लाडली हूँ, पापा ने मेरी सारी ख़्वाहिशें पूरी कीं, लेकिन अब वे मेरा चेहरा नहीं देख पाते उन्हें लगता है मेरी बेटी को आँख मिल जाए।”

बिहार के भागलपुर की बच्ची को तो एसिड से नहला दिया गया, अगर हम योनि के साथ पैदा नहीं होतीं तो बलात्कार नहीं होता? एसिड अटैक नहीं होता?

मेरा मन कहता है तब भी होता. ऐसा क्यों कह रही हूँ मैं?

क्योंकि ‘आपको’ ना/ NO सुनने की आदत नहीं.

अगर ना बोला तो बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, एसिड अटैक. यह एक तरह की कुंठा ही है जो ‘उन्हें’ NO नहीं सुनने देती.

तो गलती आखिर किसकी है हमारी? जो हम लड़की बनकर पैदा हो गए?