जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक विरोध के समर्थन में उतरे देशभर के स्कूली बच्चे, छोड़ी कक्षाएं

वैश्विक प्रदूषण के स्तर और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनिया भर की सरकारें लगी हुई हैं, लेकिन हर किसी के हाथ केवल विफलता ही लगी हैं। जिसके चलते अब देशभर के स्कूली बच्चे  जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक विरोध के समर्थन में सकड़ों पर उतर गए हैं।

बिहार के गांवों से लेकर दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, गुरुग्राम और उदयपुर जैसे कई शहरों के छात्रों ने घरती के भविष्य पर चिंता जताई है।

बता दें कि यह सिलसिला स्वीडन के एक 16 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता, ग्रेटा थुनबर्ग के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने 2018 में स्वीडन की संसद के बाहर विरोध करने के लिए शुक्रवार से स्कूल छोड़ना शुरू कर दिया।

थुनबर्ग के विरोध ने ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, युगांडा और यूनाइटेड किंगडम के छात्रों के साथ दुनिया भर के लाखों युवाओं को प्रेरित किया है, जो पहले से ही स्कूल को छोड़ रहे हैं, और अपनी सरकारों से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ काम करने की मांग कर रहे हैं।

विश्व आर्थिक मंच पर नरेंद्र मोदी से लेकर डोनाल्ड ट्रम्प तक, दुनिया के कई नेताओं की आलोचना के बाद वह सुर्खियों में आ गई, उन्होंने कहा कि वह जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार थी।

2018 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत कार्बन डाई आक्साइड का 4 वां उच्चतम उत्सर्जक है, जो वैश्विक उत्सर्जन का 7% है। वहीं 15% के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर है।

2019 ने पहले ही दुनिया भर में कई अजीबो-गरीब जलवायु संबंधी घटनाएं घटी हैं, जिससे पता चलता है कि, यह स्थिति आगे चलकर बहुत भयानक रूप लेने वाली है। अगर हमने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो, इसका अंजाम भयावह होने वाला है।

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