रियलटी चेक : तो क्या देश में मोदी सरकार ने घर-घर बिजली पहुंचा दी?

लोकसभा चुनाव सिर पर है इस चुनावी मौसम के बीच खबर चौराहा निकला है सच की तलाश में. जिसमें हम राजनीतिक पार्टियों के सच की पोल खोलेंगे.

आप सबको याद होगा की बीते साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 56 इंच का सीना दिखाकर कहा था कि वह एक लैंडमार्क हासिल करेंगे जो पूरा देश देखेगा. आपको याद दिला दें कि केंद्र सरकार ने कहा था कि वो देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा कर चुकी है.

जी हां… पीएम मोदी ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी थी, “कल हमने वो वादा पूरा किया, जिससे कई देशवासियों की जिंदगी हमेशा हमेशा के लिए बदल जायेगी”

लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही गांव-गांव, घर-घर बिजली पुहंचाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में शामिल था.

खबर चौराहे ने जब इस दावे की पड़ताल की तो आईए आपको बताते हैं सच क्या निकला…

ग्रमीण इलाकों की बात करते हैं….

मोदी सरकार के मुताबिक उन गांवों को “इलेक्ट्रिफ़ाइड” माना जाता है, जहां 10 फ़ीसदी घरों में बिजली पहुंच चुकी है और जहां सार्वजनिक स्थानों मसलन अस्पताल और स्कूलों को रोशन किया जा चुका है.

आपके लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि साल 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में करीब छह लाख गांव हैं. सरकारी पैमानें के मुताबिक इन सभी गांवों का विद्युतीकरण किया जा चुका है.

जब ज्यादा खोजबीन की गई तो हकीक़त ये सामने आई है कि इसमें से बहुत सारा काम पिछली सरकारों के कार्यकाल में किया गया.

इसका मतलब ये हुआ कि साल 2014 में जब मोदी सत्ता में आए, तब तक ज़्यादातर गांवों तक बिजली पहुंच चुकी थी. केवल 18 हज़ार गांवों का विद्युतीकरण किया जाना बाकी था.

जिसकी प्रशंसा विश्व बैंक ने भी की थी. वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक करीब 85 फ़ीसदी आबादी तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है जो केंद्र सरकार के 82 फ़ीसदी अनुमान से कहीं ज्यादा है.

आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 के विश्व बैंक की बिजली उपलब्धता रिपोर्ट के आधार पर भारत में भाजपा की सरकार बनने से पहले क़रीब 27 करोड़ आबादी तक बिजली नहीं पहुंची थी.
गौर करिएगा ये दुनिया भर में बगैर बिजली के रहने वालों की कुल संख्या का एक तिहाई है.

जिन्हें याद न भी हो उन्हें हम बता दें कि मोदी ने सितंबर 2017 में एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट लॉन्च किया था, जिसका मक़सद दिसंबर 2018 तक देश के हर घर तक बिजली पहुंचाना था.

प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब चार करोड़ लोगों तक बिजली पहुंचाना था.

अभी के सरकारी डेटा के अनुसार देश भर में 19,753 परिवारों को छोड़कर लगभग सभी घरों में बिजली पहुंचाई जा चुकी थी.

मौजूदा सरकार का दावा है कि वो अपनी पिछली सरकारों की तुलना में ज्यादा तेजी सी गांवो का विद्युतीकरण कर रही है.

मगर हकीकत कुछ और है-

विद्युतीकरण प्राधिकरण के आंकड़े कुछ और तस्वीर पेश करते हैं.

इन आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली यूपीए सरकार ने औसतन सालाना 9,000 गांवों तक बिजली पहुंचाई, जो मोदी सरकार के गांवो के विद्युतीकरण के सालाना औसत, यानी 4,000 गांवों से कहीं ज्यादा है.