लड़के ने अस्पताल में गाया था ‘अच्छा चलता हूं, दुआओं में याद रखना…’ सॉन्ग, मरने के बाद वायरल हुआ Video

सोशल मीडिया (Social Media) पर असम (Assam) के एक लड़के का इमोशनल वीडियो काफी वायरल (Viral Video) हो रहा है, जिसको देखकर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगी. ऋषभ दत्ता (Rishab Dutta) की आवाज को पिछले साल खूब पसंद किया गया था, 9 जुलाई को बेंगलुरु (Bengaluru) के अस्पताल में उनका निधन हो चुका है. 17 साल के ऋषभ दत्ता अपने गीतों के लिए 2019 में वायरल हो गए थे. लोगों ने ने उनकी मधुर आवाज़ के लिए उनकी सराहना की और उन्हें रातोंरात इंटरनेट सनसनी बना दिया.

दो साल पहले, ऋषभ को अप्लास्टिक एनीमिया (Rishab Dutta) की एक दुर्लभ स्थिति का पता चला था और दुर्भाग्य से, 9 जुलाई को मृत्यु हो गई. उनके निधन के बाद, ऋषभ के गाने के वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहे हैं, जिसको सुनकर लोग अपने आंसु नहीं रोक पा रहे हैं. फेसबुक यूजर मोनजीत गोगोई ने ऋषभ के गानों के दो वीडियो पोस्ट किए और इस क्लिप का सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया जा रहा है.

एक वीडियो में, ऋषभ ने गिटार बजाया और 2016 में रणबीर कपूर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ का हिट सॉन्ग ‘चन्ना मेरेया…’ गाया, जब वह अस्पताल में थे

rishav dutta

এই যে গীত গাই থকা ল'ৰাজন !তেওঁ আজি গীতটোত গাই থকাৰ দৰে সঁচাকৈয়ে আমাৰ মাজৰ পৰা গুচি গ'ল। তেওঁ ঋষভ দত্ত । ঘৰ তিনিচুকীয়াৰ কাকপথাৰত। দুৰাৰোগ্য ৰোগত আক্ৰান্ত হৈ বেংলুৰত মৃত্যু হয় ঋষভৰ। এটা সুন্দৰ কণ্ঠৰ অধিকাৰী ঋষভলৈ অযুত অশ্রুঞ্জলী..!

Posted by Monjit Gogoi on Thursday, July 9, 2020

उन्होंने 2013 ये जवानी है दीवानी का पॉपुलर सॉन्ग कबीरा भी गाया. उन्होंने हाथ में गिटार से म्यूजिक दिया और सुरीली आवाज में गाया. हेल्थकेयर वर्कर्स और नर्स ऋषभ के कमरे में मौजूद थे और वो ऋषभ को प्रेरित कर रही थीं

ঋষভ দত্ত

ভাল মানুহৰ লগতে সদায় বেয়া কিয় হয় ?মৃত ঋষভৰ অন্য এটা ভিডিঅ' ! কেইদিনমান আগতে বহিঃৰাজ্যৰ চিকিৎসালয়ৰ কোঠাত হাঁহি ভালপোৱা ঋষভ চিকিসকসকলৰ বাবেও প্রিয় আছিল !

Posted by Monjit Gogoi on Thursday, July 9, 2020

 

ऋषभ के वीडियो को हजारों लाइक्स और शेयर मिले. लोगों वीडियो देखकर काफी इमोशनल हो गए. एक यूजर ने लिखा, ‘आपने हमें संगीत के माध्यम से बहुत प्रेरित किया. आप अमर हो.’ वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ‘तुमने मुझे रुला दिया. तुम जहां भी हो, खुश रहो.’

ऋषभ दत्ता असम के तिनसुकिया जिले के काकोपोथर से थे. उनका शुरू में वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में और बाद में बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था.