भारत की इस देसी ट्रेन की ये 25 बातें हर रेल यात्री को ज़रूर जाननी चाहिए

भारत में बनी पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत को 15 फरवरी को पीएम मोदी हरी झंडी दिखाएंगे। नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलना शुरू होने वाली इस रेलगाड़ी में मुसाफिरों को खाना खरीदना अनिवार्य होगा। यानि यात्रियों के पास इसका कोई अन्य विकल्प नहीं है। जबकि देश की अन्य वीआईपी ट्रेन्स जैसे शताब्दी और राजधानी और दुरंतों में यात्रियों को ऑप्शन दिए जाते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं कि भारत की इस खास रेलगाड़ी में क्या-क्या खूबियां हैं।

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  • वंदे भारत नई दिल्ली और वाराणसी के बीच की 755 किलोमीटर की दूरी को 8 घंटे में तय कर लेगी।
  • इस ट्रेन में दो तरह की बोगियां हैं। एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास।
  • एसी चेयर कार का किराया 1850 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया 3520 रुपए होगा। ये किराया नई दिल्ली से वाराणसी जाने वाले यात्रियों को देना होगा।
  • इन दोनों किरायों में केटरिंग चार्ज जुड़ा हुआ है।
  • वाराणसी से दिल्ली तक का इस रेलगाड़ी में किराया चेयर कार के लिए 1795 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 3470 रुपए होगा।
  • वंदे भारत में चेयर कार का किराया शताब्दी एक्सप्रेस की चेयर कार से डेढ़ गुना ज़्यादा है। जबकि दोनों रेलगाड़ियां समान दूरी तय करेंगी।
  • वहीं इस रेलगाड़ी में एग्ज़ीक्यूटिव क्लास का किराया शताब्दी के एग्ज़ीक्यूटिव क्लास से 1.4 गुना अधिक है।
  • वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली से निकलने के बाद सिर्फ कानपुर और प्रयागराज में ही रुकेगी।
  • इस रेलगाड़ी में एग्ज़ीक्यूटिव क्लास और चेयर क्लास के लिए खाने का खर्च अलग-अलग होगा।
  • नई दिल्ली से वाराणसी तक इस रेलगाड़ी में सफर करने वाले यात्रियों को एग्जीक्यूटिव क्लास में यात्रा करने पर 399 रुपए सुबह के चाय, नाश्ते और लंच के लिए खर्च करने होंगे।
  • जबकि चेयर कार में यही रकम 344 रुपए होगी।
  • नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज में सफर करने वाले यात्रियों के लिए सुबह के चाय, नाश्ते और लंच के लिए एग्जीक्यूटिव क्लास में 155 रुपए और चेयरकार में 122 रुपए खर्च करने होंगे।
  • वाराणसी से कानपुर और प्रयागराज तक यात्रा करने वालों को एग्जिक्यूटिव क्लास में 349 रुपए और चेयरकार में 288 रुपए का खर्चा करना होगा।
  • वाराणसी से दिल्ली आने वाले यात्रियों को शाम के वक्त चाय और स्नैक्स दिया जाएगा। वहीं रात का खाना भी दिया जाएगा।
  • वंदे भारत नाम की इस ट्रेन को ट्रेन 18 के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये रेलगाड़ी 100 करोड़ रुपए की लागत से 18 महीनों में तैयार हुई है। इसे चेन्नई की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है।
  • अगर यही रेलगाड़ी विदेश से इंपोर्ट की जाती तो इसकी लागत 170 करोड़ रुपए तक पहुंची। इसलिए इस रेलगाड़ी को मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया गया है।
  • वंदे भारत ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत है इसमें इंजन का नज़र ना आना। इसके पहले कोच में ड्राइविंग सिस्टम लगा है। साथ ही उसमें 44 सीटें भी लगी हैं।
  • इस खास रेलगाड़ी में स्पेन से मंगाई गई कुछ सीटें भी लगाई गई हैं। इन सीटों की खासियत है कि ये 360 डिग्री तक घूम सकती हैं।
  • वंदे भारत के कोच में दिव्यांगों के लिए विशेषतौर पर दो बाथरूम बनाए गए हैं। इसके अलावा इस ट्रेन में बेबी केयर का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
  • इस रेलगाड़ी के हर कोच में छह सीसीटीवी कैमरा लगे हैं। ड्राइवर कोच में यात्रियों पर नज़र रखने के लिए एक सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है।
  • इस ट्रेन की दूसरी सबसे बड़ी खासियत है इसमें टॉक बैक सुविधा का होना। आपात स्थिति में इस ट्रेन में यात्रा करने वाले ड्राइवर से बात भी कर सकेंगे।
  • किसी भी आपात स्थिति में मदद के लिए वंदे भारत ट्रेन के हर कोच में दो इमरजेंसी स्विच भी लगाए गए हैं।
  • इस ट्रेन में दो एग्जिक्यूटिव क्लास कोच और 16 एसी कार कोच लगाए गए हैं।
  • इस रेलगाड़ी के एग्जिक्यूटिव क्लास में 58 सीटें हैं। जबकि एसी चेयर कार में 78 सीटें हैं।
  • इस ट्रेन में लगे सभी दरवाजे मेट्रो की तरह स्वचालित हैं। यानि प्लेटफॉर्म आने पर ये दरवाजे अपने आप खुल जाएंगे और बंद हो जाएंगे।