योगी सरकार कई और IAS का कर सकती है ट्रांसफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का असर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश के एक साथ सात जिलों के डीएम को हटाकर प्रतीक्षा सूची में डालकर यह साफ संकेत दे दिया गया है कि गड़बड़ी छवि वाले  आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर नहीं रखा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पिछले दो-तीन सालों से एक ही जिले में जमे डीएम के कामों की समीक्षा की जा रही है। इसलिए माना जा रहा है कि जल्द ही कई और जिलों के डीएम पर गाज गिर सकती है।

क्यों हटे जिलों के डीएम

शासन ने शुक्रवार की देर रात आठ जिलों के डीएम को हटाया। इसमें से सात जिलों के डीएम को प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है। सुलतानपुर व गाजीपुर में पल्स आक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीद घोटाले का खुलासा होने के बाद वहां के डीपीआरओ को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से इन दोनों जिलों के डीएम को हटाए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। यही कारण है कि इन जिलों में तेज तर्रार अफसरों को डीएम बनाया गया है। संतकबीरनगर में बेहतर काम करने वाले रवीश गुप्ता को सुलतानपुर और एलडीए के सचिव मंगला प्रसाद सिंह को गाजीपुर का डीएम बनाया गया।

जन प्रतिनिधियों की अनदेखी पड़ी भारी
सीतापुर के डीएम रहे अखिलेश तिवारी और मेरठ के अनिल ढींगरा को जन प्रतिनिधियों की अनदेखी भारी पड़ी। अखिलेश तिवारी का मामला लोकसभा में भी उठा और लोकसभा समिति ने मुख्य सचिव से इस पर जवाब तक मांगा। कहा जा रहा है  कि अखिलेश तिवारी और अनिल ढींगरा जनप्रतिनिधियों का फोन तक नहीं उठाते थे। अनिल ढींगरा पर लॉकडाउन के दौरान सामुदायिक किचन में गड़बड़ी का भी आरोप है। इसकी शिकायत सांसदों व विधायकों ने की थी। ललितपुर के डीएम योगेश कुमार शुक्ला को स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से हटाया गया है। मऊ के डीएम रहे ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी पर भी कई तरह के आरोप थे। मुख्तार के खिलाफ कार्रवाई न करने के चलते वहां के एसपी को पहले ही हटा दिया गया था। तभी से यह माना जा रहा था कि डीएम पर गाज गिरेगी। मऊ में पीसीएस से आईएएस बने राजेश पांडेय को भेजा गया है।